G Gyaanify
परीक्षा नोट्स
EN
प्राचीन इतिहास · SSC / UPSC / BSSC / राज्य PSC

मौर्य साम्राज्य

चन्द्रगुप्त की स्थापना से लेकर अशोक के शिलालेखों तक — स्रोत, राजवंश, अभिलेख एवं स्मारक, प्रशासन का सप्तांग सिद्धांत, कराधान, न्यायालय, और गूढ़पुरुषों की गुप्तचर दुनिया। उच्च-लाभ MCQ सेट के साथ परीक्षा-केंद्रित नोट्स।

321 – 185 B.C.E. 8 अध्याय 10 अभ्यास प्रश्न

मौर्य इतिहास के स्रोत

मौर्य इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए साहित्यिक और पुरातात्विक दोनों प्रकार के स्रोत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

साहित्यिक स्रोत

  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र: संस्कृत में लिखा गया यह ग्रंथ गद्य और पद्य दोनों शैलियों (महाभारत शैली) का मिश्रण है। इसमें कुल 15 भाग (अधिकरण), 180 अध्याय और 6000 श्लोक शामिल हैं। यह केवल अर्थशास्त्र की पुस्तक न होकर राजनीति, राज्य व्यवस्था और सैन्य रणनीतियों पर लिखा गया ग्रंथ है।
  • मेगस्थनीज की इंडिका: मेगस्थनीज यूनानी राजा सेल्यूकस निकेटर द्वारा भेजा गया राजदूत था जो लगभग 302 ई.पू. पाटलिपुत्र आया था। इस पुस्तक का मूल रूप अब खो चुका है। इसके अंश बाद के यूनानी-रोमन इतिहासकारों जैसे एरियन, स्ट्रैबो, डियोडोरस और प्लिनी के लेखों में सुरक्षित हैं। इसमें पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन और भारतीय समाज के 7 वर्गों का विस्तृत वर्णन है।
  • विशाखदत्त की मुद्राराक्षस: गुप्त काल के दौरान रचित एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक। इसमें विस्तृत विवरण है कि कैसे चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य की सहायता से नन्द वंश के अंतिम शासक धनानन्द का तख्तापलट किया। इस नाटक में चन्द्रगुप्त के लिए वृषल और कुलहीन (निम्न कुल में जन्मा) जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है।
  • बौद्ध साहित्य:
  • दीपवंश और महावंश (श्रीलंकाई ग्रंथ): मौर्य इतिहास, तृतीय बौद्ध संगीति और अशोक द्वारा श्रीलंका (सिंहल द्वीप) में बौद्ध धर्म के प्रचार के प्रयासों की जानकारी प्रदान करते हैं।
  • दिव्यावदान: अशोक के जीवन, उनकी माता सुभद्रांगी (या धर्मा) और तक्षशिला के विद्रोह को दबाने की घटनाओं का उल्लेख करता है।
  • जातक कथाएं: सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का वर्णन करती हैं।
📌 महत्वपूर्ण

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित सोहगौरा ताम्रपत्र और बांग्लादेश के बोगरा जिले में स्थित महास्थान अभिलेख भारत में अकाल राहत उपायों और अनाज भंडारण के लिए निर्मित कोष्ठगारों (राजकीय अन्नागार) के सबसे पुराने अभिलेखीय साक्ष्य हैं।

⚠️ अपवाद

मेगस्थनीज की इंडिका के अनुसार प्राचीन भारत में दास प्रथा का अस्तित्व नहीं था। यह तथ्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र और बौद्ध ग्रंथों के विपरीत है, जिससे प्रतीत होता है कि मेगस्थनीज भारतीय समाज की उदार दास प्रथा और यूनान की क्रूर दासता के अंतर को समझ नहीं पाया।

मौर्य राजवंश (321 ई.पू. – 185 ई.पू.)

चन्द्रगुप्त मौर्य (321 ई.पू. – 297 ई.पू.)

  • संस्थापक: अपने गुरु चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) की सहायता से धनानन्द का वध कर साम्राज्य की नींव रखी।
  • यूनानी नाम: यूनानी लेखकों (जस्टिन, प्लूटार्क आदि) ने इन्हें सैंड्रोकोटस या एंड्रोकोटस कहा है। सर्वप्रथम विलियम जोन्स (1784) ने प्रमाणित किया कि सैंड्रोकोटस ही चन्द्रगुप्त मौर्य हैं।
  • सेल्यूकस निकेटर के साथ युद्ध (305 ई.पू.): यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर को पराजित किया। संधि के तहत सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त को निम्नलिखित चार प्रांत सौंप दिए:
  • पैरोपनिसदाई (काबुल)
  • एरिया (हेरात)
  • अराकोसिया (कंधार)
  • गेड्रोसिया (बलूचिस्तान)
  • वैवाहिक संबंध: सेल्यूकस की पुत्री हेलेना (कारनेलिया) से विवाह किया। उपहार स्वरूप चन्द्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 युद्ध हाथी भेंट किए।
  • सुदर्शन झील का निर्माण: चन्द्रगुप्त के सौराष्ट्र (गुजरात) के प्रांतीय गवर्नर (राष्ट्रीय) पुष्यगुप्त वैश्य ने जूनागढ़ के निकट गिरनार क्षेत्र में सुदर्शन झील का निर्माण कराया।
  • जीवन का अंतिम समय: जीवन के अंतिम दिनों में जैन धर्म स्वीकार किया और सिंहासन त्याग दिया। जैन मुनि भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) चले गए, जहाँ सल्लेखना / संथारा विधि (उपवास द्वारा प्राण त्यागना) से शरीर का त्याग किया।

बिन्दुसार (297 ई.पू. – 272 ई.पू.)

  • उपाधियां: यूनानी ग्रंथों में इन्हें अमित्रघात या अमित्रोकेट्स (शत्रुओं का संहारक) कहा गया है। वायु पुराण में इन्हें भद्रसार या वारिसार और जैन ग्रंथों में सिंहसेन कहा गया है। इनकी माता का नाम दुर्धरा था।
  • विदेश नीति:
  • सीरिया के शासक एंटियोकस प्रथम को पत्र लिखकर तीन वस्तुएं मांगी: मीठी मदिरा (शराब), सूखे अंजीर और एक दार्शनिक (सोफिस्ट)। एंटियोकस ने शराब और अंजीर तो भेज दिए, पर दार्शनिक भेजने से इनकार कर दिया क्योंकि यूनानी कानून दार्शनिकों के व्यापार की अनुमति नहीं देते थे।
  • दरबार में आए विदेशी राजदूत: सीरिया से डाइमेकस (डेमोस्कस) और मिस्र के राजा टॉलेमी द्वितीय फिलाडेल्फस द्वारा भेजा गया डायोनिसियस।
  • धार्मिक विश्वास: बिन्दुसार आजीवक संप्रदाय के अनुयायी थे (जिसकी स्थापना मक्खलि गोशाल ने की थी; यह संप्रदाय 'नियतिवाद' या भाग्य पर विश्वास करता था)।
  • तक्षशिला विद्रोह: बिन्दुसार के शासनकाल में तक्षशिला (सिंधु और झेलम के बीच) में भीषण विद्रोह हुआ। इसे दबाने के लिए पहले बड़े पुत्र सुसीम को भेजा गया जो असफल रहा, फिर अशोक को भेजा गया जिसने क्रूरतापूर्वक विद्रोह को शांत किया।

सम्राट अशोक (272 ई.पू. – 232 ई.पू.)

  • राज्यारोहण: बिन्दुसार के समय वे तक्षशिला और उज्जैन के गवर्नर (वायसराय) थे। बिन्दुसार की मृत्यु के बाद 4 वर्ष तक उत्तराधिकार का गृहयुद्ध चला। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक ने अपने मंत्री राधागुप्त की मदद से 99 भाइयों की हत्या कर सिंहासन हासिल किया (केवल सबसे छोटे भाई तिस्स को जीवित रखा)। इनका औपचारिक राज्याभिषेक 269 ई.पू. में हुआ।
  • कलिंग युद्ध (261 ई.पू.): अपने राज्याभिषेक के 9वें वर्ष में कलिंग पर आक्रमण किया। इस युद्ध की विभीषिका और नरसंहार का उल्लेख अशोक के 13वें शिलालेख में मिलता है।
  • वैचारिक परिवर्तन: युद्ध के विनाश को देखकर अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ। उन्होंने भेरीघोष (भौतिक विजय) को त्यागकर धम्मघोष (सांस्कृतिक/नैतिक विजय) की नीति अपनाई।
  • बौद्ध धर्म में दीक्षा: सर्वप्रथम बाल भिक्षु निग्रोध ने इन्हें बौद्ध धर्म से परिचित कराया, तत्पश्चात उपगुप्त ने इन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा दी।
  • धम्म प्रचार: अपने राज्याभिषेक के 14वें वर्ष में धम्म महामात्रों की नियुक्ति की। बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा।

अशोक के शिलालेख और स्मारक

भारत में शिलालेखों के माध्यम से जनता को संबोधित करने वाले अशोक पहले शासक थे।

भाषा एवं लिपि संरचना

  • ब्राह्मी लिपि: भारत के अधिकांश हिस्सों में प्रयुक्त (बाएं से दाएं लिखी जाने वाली लिपि)।
  • खरोष्ठी लिपि: उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (शाहबाजगढ़ी और मनसेहरा) में प्रयुक्त (दाएं से बाएं लिखी जाने वाली लिपि)।
  • यूनानी और अरामी (Aramaic): अफगानिस्तान सीमावर्ती क्षेत्रों (कंधार) में प्रयुक्त।
💡 सुझाव

अशोक का कंधार अभिलेख द्विभाषी (bilingual) है, जो यूनानी और अरामी दोनों लिपियों में लिखा गया है। जबकि अफगानिस्तान के लम्पक (लघमान) से प्राप्त खंडित अभिलेख केवल अरामी लिपि में है।

शिलालेख खोज के ऐतिहासिक तथ्य
• खोजकर्ता: 1750 में पादरी टिफेंथेलर द्वारा
• सर्वप्रथम पढ़ा: 1837 में जेम्स प्रिंसेप द्वारा
• टोपरा और मेरठ स्तंभ: फिरोज शाह तुगलक द्वारा खींचकर दिल्ली लाए गए
• कौशाम्बी स्तंभ: जहांगीर द्वारा इलाहाबाद लाया गया

14 वृहत शिलालेख (Major Rock Edicts)

शिलालेख मुख्य विषय और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
पहला (RE I) पशु बलि पर प्रतिबंध और उत्सवों का निषेध। शाही रसोई में केवल दो मोर और एक हिरण मारने की अनुमति थी।
दूसरा (RE II) मनुष्य और पशु दोनों के लिए चिकित्सा व्यवस्था। दक्षिण भारतीय राज्यों का उल्लेख: चोल, पाण्ड्य, सत्यपुत्र, केरलपुत्र, ताम्रपर्णी (श्रीलंका)।
तीसरा (RE III) राजकीय अधिकारियों (प्रादेशिक, राजुक, युक्त) को हर पांचवें वर्ष राज्य के दौरे (धम्म यात्रा) पर जाने का आदेश।
चौथा (RE IV) भेरीघोष के स्थान पर धम्मघोष की नीति की घोषणा।
पांचवां (RE V) धम्म महामात्रों की नियुक्ति का उल्लेख और दासों व गरीबों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण की अपील।
छठा (RE VI) लोक कल्याणकारी और प्रशासनिक उपाय; मंत्रिपरिषद और लोक संरक्षकों/संवाददाताओं (प्रतिवेदक) की भूमिका का उल्लेख।
सातवां (RE VII) सभी धार्मिक संप्रदायों के बीच सहिष्णुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अपील।
आठवां (RE VIII) अशोक की पहली धम्म यात्रा (बोधगया और बोधि वृक्ष की यात्रा) का वर्णन (राज्याभिषेक के 10वें वर्ष)।
नौवां (RE IX) व्यर्थ के रीति-रिवाजों और अंधविश्वासों की निंदा; धम्म आचरण को ही सर्वोत्तम मांगलिक कार्य बताया।
दसवां (RE X) व्यक्तिगत ख्याति, यश और गौरव की लालसा की निंदा; धम्म के प्रचार-प्रसार को ही सबसे बड़ा गौरव माना।
ग्यारहवां (RE XI) धम्म की विस्तृत व्याख्या और धम्म दान को सर्वश्रेष्ठ दान बताया।
बारहवां (RE XII) धार्मिक सहिष्णुता पर बल; महिला कल्याण के लिए विशेष अधिकारियों (स्त्री-अध्यक्ष महामात्र) की नियुक्ति का उल्लेख।
तेरहवां (RE XIII) कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) का साक्ष्य; अशोक के 5 समकालीन यूनानी राजाओं के नाम: एंटियोकस द्वितीय (सीरिया), टॉलेमी द्वितीय (मिस्र), एंटिगोनस गोनाटास (मेसिडोनिया), मगास (साइरीन), अलेक्जेंडर (एपिरस)।
चौदहवां (RE XIV) शिलालेखों को लिखवाने के उद्देश्य और उनके विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में वितरण का वर्णन।

लघु शिलालेख और स्तंभ लेख

  • नाम का साक्ष्य: केवल चार लघु शिलालेखों में अशोक का व्यक्तिगत नाम 'अशोक' लिखा हुआ मिलता है:
  • मास्की (कर्नाटक)
  • ब्रह्मगिरी (कर्नाटक)
  • नेत्तूर (आंध्र प्रदेश — स्लाइड वर्गीकरण के अनुसार)
  • गुर्जरा (मध्य प्रदेश)
  • रुम्मिनदेई स्तंभ अभिलेख (नेपाल): अशोक के राज्याभिषेक के 20वें वर्ष में लुम्बिनी (बुद्ध के जन्मस्थान) की यात्रा का साक्ष्य। यह एकमात्र कर-संबंधी (आर्थिक) अभिलेख है। इसके तहत उन्होंने भू-राजस्व कर (भाग) को घटाकर 1/8 कर दिया और धार्मिक कर (बलि) को पूर्णतः समाप्त कर दिया।
  • निगाली सागर अभिलेख (नेपाल): यहाँ अशोक ने कनकमुनि (कोनागमन) बुद्ध के स्तूप के आकार को दोगुना कराया था।
  • रानी का अभिलेख (इलाहाबाद-कौशाम्बी स्तंभ): इसमें अशोक की कारुवाकी (कौरवकी) नामक रानी द्वारा दिए गए दान का उल्लेख है।
  • सारनाथ सिंह स्तंभ: इसे 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया। इसमें चार सिंह एक-दूसरे की ओर पीठ किए खड़े हैं। इसके नीचे फलक (abacus) पर चार पशु: सिंह, हाथी, घोड़ा और बैल अंकित हैं जो धर्म चक्रों द्वारा विभाजित हैं, और पूरा ढांचा एक उल्टे कमल पर स्थित है।
Illustration
गिरनार का अशोक शिलालेख स्थलइस जगह छवि जोड़ें — इस ब्लॉक को <img> टैग से बदलें।

मौर्य प्रशासन

मौर्य प्रशासन प्राचीन विश्व के सबसे अधिक केंद्रीकृत और विस्तृत नौकरशाही तंत्रों में से एक था।

कौटिल्य का राज्य का सप्तांग सिद्धांत

कौटिल्य ने राज्य को सात अंगों वाले एक जीवित शरीर के रूप में परिभाषित किया था:
* राजा (स्वामी): सिर/मस्तिष्क।
* अमात्य (मंत्री): आँखें।
* जनपद (क्षेत्र एवं जनसंख्या): पैर/जंघा।
* दुर्ग (किला): भुजाएं।
* कोश (खजाना): मुख।
* दंड (सेना/बल): मस्तिष्क/मन।
* मित्र (संबद्ध देश): कान।

प्रांतीय प्रशासन

साम्राज्य को पांच मुख्य प्रांतों में विभाजित किया गया था, जिनका संचालन राजपरिवार के राजकुमार (कुमार / आर्यपुत्र) प्रांतीय गवर्नर के रूप में करते थे:

              [उत्तर] उत्तरापथ (राजधानी: तक्षशिला)
                            │
[पश्चिम] अवंतीपथ ── [मध्य प्रांत] प्राची (राजधानी: पाटलिपुत्र) ── [पूर्व] दक्षिणापथ (राजधानी: तोसाली)
 (राजधानी: उज्जैन)          │
              [दक्षिण] दक्षिणापथ (राजधानी: सुवर्णगिरी)

प्रशासनिक पदानुक्रम

राजा (सर्वोच्च सैन्य, न्यायिक और कार्यकारी अधिकारी)
  → प्रांत (चक्र — कुमार / आर्यपुत्र के अधीन)
    → मंडल / जिला (आहार / विषय — प्रादेशिक और राजुक के अधीन)
      → स्थानीय (800 गांवों का समूह)
        → द्रोणमुख (400 गांवों का समूह)
          → खरवटिक (200 गांवों का समूह)
            → संग्रहण (10 गांवों का समूह — गोप अधिकारी के अधीन)
              → ग्राम (ग्रामिका / ग्रामणी — ग्रामवृद्धों की सहायता से संचालित)

नगर प्रशासन (पाटलिपुत्र)

मेगस्थनीज के अनुसार, पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन 30 सदस्यों के एक मंडल द्वारा चलाया जाता था, जो 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) में विभाजित था:
1. उद्योग एवं शिल्प कला का निरीक्षण।
2. विदेशियों की देखभाल व सुरक्षा।
3. जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (जनसंख्या रिकॉर्ड)।
4. व्यापार, वाणिज्य और बाट-माप का नियंत्रण।
5. निर्मित वस्तुओं की बिक्री और मिलावट पर नजर रखना।
6. बेची गई वस्तुओं पर 10% बिक्री कर (चुंगी) वसूलना।

कराधान और न्यायिक प्रणाली

दो प्रकार के न्यायालय

  • धर्मस्थीय न्यायालय (दीवानी अदालत): व्यक्तिगत, पारिवारिक और व्यापारिक विवादों का निपटारा करता था। इसमें तीन अमात्य और तीन व्यावहारिक (मुख्य न्यायाधीश) बैठते थे।
  • कंटकशोधन न्यायालय (फौजदारी अदालत): अपराधियों, असामाजिक तत्वों और राज्य के विरुद्ध अपराधों का निपटारा करता था। इसमें तीन प्रदेष्टा (प्रदेष्ट्री) न्यायाधीश होते थे।

कराधान और वित्तीय शब्दावली

  • भाग: मुख्य भूमि कर (भू-राजस्व), जो कुल उपज का 1/4 से 1/6 भाग तक होता था।
  • बलि: एक प्रकार का अतिरिक्त या धार्मिक कर, जिसे अशोक ने लुम्बिनी में समाप्त कर दिया था।
  • हिरण्य: नकद या सोने के रूप में चुकाया जाने वाला कर।
  • प्रणय: संकट काल में राज्य द्वारा लिया जाने वाला आपातकालीन कर या स्वैच्छिक दान।
  • पिण्डक / पिण्डकर: पूरे गाँव से सामूहिक रूप से लिया जाने वाला वार्षिक अनाज कर।
  • सेनाभक्तम: गाँव से सेना के गुजरने पर उनके भोजन व रसद के लिए ग्रामीणों पर लगाया जाने वाला कर।
  • पार्श्वम: अतिरिक्त लाभ या अधिभार (Surcharge)।
  • वर्तनी: सड़कों और व्यापारिक मार्गों पर वसूला जाने वाला मार्ग कर (Transit Tax)।
  • विष्टि: बेगार या मुफ्त श्रम, जो मुख्य रूप से शूद्रों और दासों से लिया जाता था।
  • शुल्क: नगर में प्रवेश करने वाले व्यापारिक माल पर लिया जाने वाला सीमा शुल्क (Customs Duty)।
⚠️ अपवाद

यद्यपि कर प्रणाली अत्यंत विस्तृत थी, परंतु मौर्य काल में पुजारियों या बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (Brahmadeya) देने की प्रथा शुरू नहीं हुई थी। धार्मिक संस्थाओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान देने की यह प्रथा बाद में सातवाहन राजवंश के समय शुरू हुई।

राजकीय अधिकारी और गुप्तचर प्रणाली

अर्थशास्त्र के प्रमुख 'तीर्थ' (सर्वोच्च अधिकारी)

  • मंत्री: प्रधानमंत्री
  • पुरोहित: मुख्य पुजारी और राजा के धार्मिक व राजकीय सलाहकार
  • सेनापति: सैन्य बल का सर्वोच्च सेनानायक
  • युवराज: उत्तराधिकारी राजकुमार जो शासन में सहायता करता था
  • दौवारिक: राजकीय महलों का रक्षक / द्वारपाल
  • अंतर्वेशिक: सम्राट के हरम और अंतःपुर का रक्षक अधिकारी
  • प्रशास्त्री: राजकीय कारागार विभाग का महानिरीक्षक और अभिलेखों का संरक्षक
  • समाहर्ता: राजस्व विभाग का सर्वोच्च कर निर्धारक और बजट अधिकारी
  • सन्निधाता: राजकीय कोषाध्यक्ष (Treasury Custodian)
  • प्रदेष्टा: फौजदारी न्यायालयों का मुख्य न्यायाधीश / प्रांतीय आयुक्त

प्रमुख 'अध्यक्ष' (विभागों के अधीक्षक)

  • सीताध्यक्ष: कृषि विभाग का प्रमुख (राजकीय भूमि का प्रबंधक)
  • अकराध्यक्ष: खानों और खनिजों का अधीक्षक
  • लोहाध्यक्ष: धातु विज्ञान और लोहे से संबंधित उद्योगों का अधीक्षक
  • लक्षणाध्यक्ष: टंकणशाला (टकसाल) और सिक्कों का मुख्य अधीक्षक
  • नवाध्यक्ष: नौवहन और जलमार्गों का अधीक्षक
  • पण्याध्यक्ष: राज्य के व्यापार और वाणिज्य का नियंत्रक
  • पौतवाध्यक्ष: बाट, माप और तराजू का निरीक्षक
  • शुल्काध्यक्ष: चुंगी, सीमा शुल्क और व्यापारिक करों का संग्राहक
  • मुद्राध्यक्ष: पासपोर्ट और राजकीय पास जारी करने वाला अधिकारी
  • गणिकाध्यक्ष: वेश्याओं और राजकीय नर्तकियों के विभाग का नियामक

गुप्तचर प्रणाली (Espionage)

गुप्तचर विभाग का सर्वोच्च अधिकारी महामात्य सर्प (या महामात्य-पसर्प) कहलाता था। गुप्तचरों को अर्थशास्त्र में गूढ़पुरुष या रहस्यमयी व्यक्ति कहा गया है। गुप्तचरों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
* संस्था (स्थिर गुप्तचर): वे जासूस जो एक ही निश्चित स्थान (जैसे मंदिर, सराय, दुकान) पर रहकर गुप्त सूचनाएं एकत्र करते थे।
* संचारी (भ्रमणशील गुप्तचर): वे जासूस जो भेष बदलकर पूरे राज्य में घूमते थे और सूचनाएं राजा तक पहुंचाते थे।
* प्रतिवेदक: राजा के विशेष संवाददाता जिन्हें किसी भी समय सीधे राजा से मिलकर जनता की समस्याएं बताने का अधिकार था।
* विषकन्या: शत्रु राजाओं या उच्चाधिकारियों की हत्या के लिए प्रशिक्षित विषैली महिलाएं।

त्वरित पुनरीक्षण तालिका

मानक / शासक चन्द्रगुप्त मौर्य बिन्दुसार सम्राट अशोक
शासन काल 321 ई.पू. – 297 ई.पू. 297 ई.पू. – 272 ई.पू. 272 ई.पू. – 232 ई.पू.
राजवंश में भूमिका साम्राज्य के संस्थापक द्वितीय महान सम्राट चरम सीमा और भौगोलिक विस्तार
यूनानी नाम सैंड्रोकोटस / एंड्रोकोटस अमित्रघात / अमित्रोकेट्स देवानांपिय प्रियदस्सी (राजकीय नाम)
धार्मिक झुकाव जैन धर्म (सल्लेखना विधि से शरीर त्याग) आजीवक संप्रदाय (मक्खलि गोशाल के अनुयायी) बौद्ध धर्म (कलिंग युद्ध के बाद स्वीकृत)
प्रमुख राजदूत मेगस्थनीज (सेल्यूकस द्वारा भेजा गया) डाइमेकस (सीरिया), डायोनिसियस (मिस्र) यूनानी राजाओं के पास धम्म दूत भेजे
प्रशासनिक योगदान सप्तांग सिद्धांत, सुदर्शन झील का निर्माण तक्षशिला विद्रोह का दमन (अशोक द्वारा) 14 शिलालेख, 7 स्तंभ लेख, धम्म का प्रचार

अति-संभावित परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

Q1निम्नलिखित में से कौन सा अशोक का शिलालेख यूनानी और अरामी (Aramaic) दोनों लिपियों में लिखा गया एक द्विभाषी शिलालेख है?

(A) मास्की लघु शिलालेख (B) कंधार का शिलालेख (C) शाहबाजगढ़ी का शिलालेख (D) रुम्मिनदेई स्तंभ लेख

उत्तर देखें

उत्तर: (B) कंधार का शिलालेख

Q2मौर्य प्रशासन में राजस्व एकत्र करने और राष्ट्रीय बजट का निर्धारण करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा सर्वोच्च अधिकारी उत्तरदायी था?

(A) सन्निधाता (B) अक्षपटलिक (C) समाहर्ता (D) सीताध्यक्ष

उत्तर देखें

उत्तर: (C) समाहर्ता

Q3मौर्य काल में संकट के समय राज्य द्वारा वसूले जाने वाले विशेष आपातकालीन या भेंट कर को किस नाम से जाना जाता था?

(A) हिरण्य (B) प्रणय (C) सेनाभक्तम (D) विष्टि

उत्तर देखें

उत्तर: (B) प्रणय

Q4प्राचीन भारतीय इतिहास में सोहगौरा ताम्रपत्र अभिलेख क्यों अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है?

(A) इसमें अशोक के राज्याभिषेक का सबसे पुराना वर्णन है (B) इसमें बौद्ध भिक्षुओं को भूमि दान देने का साक्ष्य है (C) इसमें अकाल राहत उपायों और अन्नागारों के निर्माण का उल्लेख है (D) इसमें चन्द्रगुप्त और सेल्यूकस के बीच हुई संधि दर्ज है

उत्तर देखें

उत्तर: (C) इसमें अकाल राहत उपायों और अन्नागारों के निर्माण का उल्लेख है

Q5मेगस्थनीज की इंडिका के अनुसार, मौर्यों की राजधानी पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन कुल कितने सदस्यों के मंडल द्वारा चलाया जाता था?

(A) 15 सदस्य (B) 20 सदस्य (C) 30 सदस्य (D) 45 सदस्य

उत्तर देखें

उत्तर: (C) 30 सदस्य

Q6मौर्य सैन्य प्रणाली के अंतर्गत घोड़ों की सेना (कैवेलरी) के विभाग के मुख्य अधीक्षक को क्या कहा जाता था?

(A) हस्त्याध्यक्ष (B) अश्वाध्यक्ष (C) रथाध्यक्ष (D) पत्त्यध्यक्ष

उत्तर देखें

उत्तर: (B) अश्वाध्यक्ष

Q7अपने राज्याभिषेक के किस वर्ष में अशोक ने प्रसिद्ध कलिंग युद्ध लड़ा था, जिसका वर्णन उनके 13वें वृहत शिलालेख में मिलता है?

(A) पांचवें वर्ष (B) आठवें वर्ष (C) नौवें वर्ष (D) चौदहवें वर्ष

उत्तर देखें

उत्तर: (C) नौवें वर्ष

Q8किस प्राचीन साहित्यिक ग्रंथ में चन्द्रगुप्त मौर्य को "वृषल" और "कुलहीन" कहकर संबोधित किया गया है, जो उनके निम्न सामाजिक वर्ग को दर्शाता है?

(A) कौटिल्य का अर्थशास्त्र (B) विशाखदत्त का मुद्राराक्षस (C) मेगस्थनीज की इंडिका (D) दिव्यावदान

उत्तर देखें

उत्तर: (B) विशाखदत्त का मुद्राराक्षस

Q9आजीवक संप्रदाय के भिक्षुओं के निवास के लिए गया के निकट प्रसिद्ध नागार्जुन गुफाओं का निर्माण किसने करवाया था?

(A) सम्राट अशोक (B) दशरथ मौर्य (C) सम्प्रति मौर्य (D) बिन्दुसार

उत्तर देखें

उत्तर: (B) दशरथ मौर्य

Q10मौर्य काल में दीवानी मामलों और व्यक्तिगत विवादों का निपटारा करने वाले दीवानी न्यायालयों को क्या कहा जाता था?

(A) कंटकशोधन न्यायालय (B) धर्मस्थीय न्यायालय (C) व्यावहारिक न्यायालय (D) जनपद न्यायालय

उत्तर देखें

उत्तर: (B) धर्मस्थीय न्यायालय