अध्याय 1: नास्तिक संप्रदायों की उत्पत्ति और सामाजिक-आर्थिक कारक
- सामाजिक-आर्थिक उथल-पुथल: छठी शताब्दी ईसा पूर्व में क्षेत्रीय राज्यों (महाजनपदों) का उदय हुआ, द्वितीय शहरीकरण का विकास हुआ, व्यापार का विस्तार हुआ और आहत सिक्कों (punch-marked coins) का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
- वर्ण व्यवस्था की कठोरता: वैदिक वर्ण व्यवस्था की जन्म-आधारित कठोरता और अनुष्ठानों पर ब्राह्मणवादी वर्चस्व के कारण क्षत्रियों में प्रतिक्रिया हुई (बुद्ध और महावीर दोनों क्षत्रिय कुलों से संबद्ध थे)।
- बौद्धिक क्रांति: इस काल में कुल 62 नास्तिक संप्रदायों (जिन्होंने वेदों की सर्वोच्चता को अस्वीकार किया) का उदय हुआ, जिनमें बौद्ध और जैन धर्म सबसे प्रमुख थे।
बौद्ध और जैन दोनों नास्तिक संप्रदाय थे, क्योंकि उन्होंने वेदों की पूर्ण सत्ता को खारिज कर दिया, पशु बलि का विरोध किया और जन्म-आधारित सामाजिक स्तरीकरण को अस्वीकार किया।
अध्याय 2: बौद्ध धर्म — गौतम बुद्ध, सिद्धांत, संगीतियां और संप्रदाय
A. गौतम बुद्ध का जीवन परिचय
- जन्म: 563 ईसा पूर्व में वैशाख पूर्णिमा के दिन लुम्बिनी (कपिलवस्तु, नेपाल) में हुआ। बुद्ध के जन्मस्थान की पुष्टि सम्राट अशोक के रुम्मिन्देई/रुमिनी देई स्तंभ शिलालेख से होती है।
- वंश: शाक्य कुल (क्षत्रिय)। पिता: शुद्धोधन (कपिलवस्तु के शासक)। माता: महामाया (जन्म के सातवें दिन मृत्यु)। सौतेली/पालक माता: महाप्रजापति गौतमी।
- गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण): 29 वर्ष की आयु में चार दृश्य देखने के बाद: वृद्ध व्यक्ति, बीमार व्यक्ति, मृत शरीर और सन्यासी।
- गुरु: आलार कलाम (राजगृह में; सांख्य दर्शन और 'शून्य' की प्राप्ति की शिक्षा दी); रुद्रक रामपुत्र (योग की शिक्षा दी)।
- ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण): 35 वर्ष की आयु में, 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद उरुवेला (बोधगया, बिहार) में निरंजना (फाल्गु) नदी के तट पर पीपल (बोधि) वृक्ष के नीचे हुआ। सुजाता नामक कन्या ने खीर अर्पित की थी।
- प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन): सारनाथ (ऋषिपत्तन, वाराणसी) में पांच शिष्यों (अश्वजीत, उपालि, मोगालाना, सारिपुत्र और आनंद) को दिया।
- महापरिनिर्वाण (मृत्यु): 483 ईसा पूर्व (80 वर्ष की आयु) में कुशीनगर (कस्या ग्राम, देवरिया जिला, यूपी) में चुन्द (लोहार) द्वारा अर्पित भोजन ग्रहण करने के बाद हुआ। अस्थियों को 8 भागों में विभाजित कर स्तूप बनवाए गए।
- सर्वाधिक उपदेश: कोसल राज्य की राजधानी श्रावस्ती में दिए।
गौतम बुद्ध ने स्वयं कोई ग्रंथ नहीं लिखा। उनकी शिक्षाओं का संकलन उनकी मृत्यु के बाद प्रथम बौद्ध संगति में मौखिक रूप से किया गया था।

| बुद्ध के जीवन की घटनाएं | संस्कृत नाम | प्रतीक |
|---|---|---|
| जन्म | जन्म | कमल और सांड |
| गृहत्याग | महाभिनिष्क्रमण | घोड़ा (कंथक) |
| ज्ञान प्राप्ति | निर्वाण | बोधि वृक्ष (पीपल) / पदचिह्न |
| प्रथम उपदेश | धर्मचक्रप्रवर्तन | धर्मचक्र (पहिया) |
| मृत्यु | महापरिनिर्वाण | स्तूप |
परीक्षा में मिलान वाले प्रश्नों के लिए B-L-R-H-E-B-S-W-D-S (जन्म-कमल, गृहत्याग-घोड़ा, ज्ञान-बोधि, उपदेश-चक्र, मृत्यु-स्तूप) याद रखने की शार्टकट ट्रिक है।
B. सिद्धांत और दर्शन
- चार आर्य सत्य:
- दुख: संसार दुखों से भरा है।
- समुदाय: दुख का मूल कारण इच्छा/तृष्णा (Tanha) है।
- निरोध: इच्छाओं पर विजय पाकर दुख दूर किया जा सकता है।
- मार्ग: अष्टांगिक मार्ग का पालन कर दुख दूर किया जा सकता है।
- अष्टांगिक मार्ग: इसे प्रज्ञा, शील और समाधि में वर्गीकृत किया गया है।
- सम्यक दृष्टि (Right View)
- सम्यक संकल्प (Right Intention)
- सम्यक वाक (Right Speech)
- सम्यक कर्मांत (Right Action)
- सम्यक आजीव (Right Livelihood)
- सम्यक व्यायाम (Right Effort)
- सम्यक स्मृति (Right Mindfulness)
- सम्यक समाधि (Right Concentration)
- त्रिरत्न: बुद्ध (संस्थापक), धम्म (शिक्षाएं), संघ (भिक्षु संघ)।
- मध्यम मार्ग: यह अत्यधिक विलासिता और अत्यधिक कठोर तपस्या दोनों के निषेध की वकालत करता है।
- पुनर्जन्म और कर्म: बौद्ध धर्म कर्म और पुनर्जन्म में विश्वास करता है, लेकिन आत्मा (अनात्मवाद) के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता।
बौद्ध धर्म एक अनीश्वरवादी व्यवस्था है। यह किसी निर्माता ईश्वर या स्थायी आत्मा (atman) को स्वीकार नहीं करता, परंतु पुनर्जन्म में दृढ़ता से विश्वास करता है।
C. बौद्ध संगीतियां और संप्रदाय
बौद्ध संगीतियां:
* प्रथम बौद्ध संगति (483 ई.पू.): राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में। संरक्षक: अजातशत्रु (हर्यंक वंश)। अध्यक्ष: महाकश्यप। सुत्त पिटक (आनंद द्वारा) और विनय पिटक (उपालि द्वारा) का संकलन हुआ।
* द्वितीय बौद्ध संगति (383 ई.पू.): वैशाली में। संरक्षक: कालाशोक (शिशुनाग वंश)। अध्यक्ष: सावकमी। यह स्थविरवादी और महासांघिक संप्रदायों में विभाजित हुई।
* तृतीय बौद्ध संगति (250 ई.पू.): पाटलिपुत्र में। संरक्षक: अशोक (मौर्य वंश)। अध्यक्ष: मोग्गलिपुत्त तिस्स। अभिधम्म पिटक का संकलन हुआ और कथावत्थु को जोड़ा गया।
* चतुर्थ बौद्ध संगति (72 ई. / प्रथम शताब्दी ई.): कुंडलवन (कश्मीर) में। संरक्षक: कनिष्क (कुषाण वंश)। अध्यक्ष: वसुमित्र (उपाध्यक्ष: अश्वघोष)। बौद्ध धर्म हीनयान और महायान संप्रदायों में औपचारिक रूप से विभाजित हुआ।
प्रमुख संप्रदाय:
* हीनयान (Theravada): बुद्ध की मूल शिक्षाओं में विश्वास, आत्म-अनुशासन द्वारा व्यक्तिगत मोक्ष, मूर्ति पूजा का निषेध, पालि भाषा का प्रयोग।
* महायान: बुद्ध को देवता मानना, बोधिसत्व की कृपा से सभी के कल्याण पर बल, मूर्ति पूजा की अनुमति, संस्कृत भाषा का प्रयोग।
* वज्रयान: तांत्रिक बौद्ध धर्म, जादुई शक्तियों (वज्र) और तारा (महिला देवी) में विश्वास; पूर्वी भारत (पाल काल में बंगाल और बिहार) में लोकप्रिय।
जहाँ हीनयान मुख्य रूप से श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस (दक्षिणी बौद्ध धर्म) में लोकप्रिय है, वहीं महायान चीन, जापान, कोरिया और तिब्बत (उत्तरी बौद्ध धर्म) में हावी है। वज्रयान तिब्बत, मंगोलिया और भूटान में प्रचलित है।
अध्याय 3: बौद्ध साहित्य, वास्तुकला और विश्वविद्यालय
A. बौद्ध साहित्य
- त्रिपिटक (पालि भाषा में 'तीन टोकरियाँ'):
- विनय पिटक: भिक्षुओं और भिक्षुणियों के लिए मठवासी नियम। उप-भाग: सुत्तविभंग, खंधक और परिवारपाठ।
- सुत्त पिटक: बुद्ध के उपदेश और धार्मिक सिद्धांत। यह 5 निकायों में विभाजित है:
- दीघ निकाय (दीर्घ उपदेश)
- मज्झिम निकाय (मध्यम उपदेश)
- संयुत्त निकाय (संबद्ध उपदेश)
- अंगुत्तर निकाय (संख्यात्मक; इसमें 16 महाजनपदों का उल्लेख है)
- खुद्दक निकाय (लघु ग्रंथ; इसमें जातक कथाएं और थेरीगाथा शामिल हैं)
- अभिधम्म पिटक: बुद्ध की शिक्षाओं का दार्शनिक विश्लेषण (प्रश्न-उत्तर रूप में)। इसमें 7 पुस्तकें हैं; सबसे महत्वपूर्ण मोग्गलिपुत्त तिस्स द्वारा रचित कथावत्थु है।
- अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ:
- मिलिंदपन्हो: इंडो-ग्रीक राजा मेनांडर (मिलिंद) और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच पालि भाषा में संवाद।
- बुद्धचरित: संस्कृत में अश्वघोष द्वारा रचित बुद्ध की महाकाव्य जीवनी।
- दीपवंश और महावंश: श्रीलंका के ऐतिहासिक ग्रंथ जो बौद्ध धर्म के प्रसार का विवरण देते हैं।
B. बौद्ध वास्तुकला और बोधिसत्व
- स्तूप वास्तुकला के तत्व:
- अण्ड: ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करने वाला अर्धगोलाकार गुंबद।
- हर्मिका: अण्ड के ऊपर स्थित रेलिंगदार बालकनी जिसमें बुद्ध या भिक्षुओं के पवित्र अवशेष रखे जाते हैं।
- छत्र: हर्मिका के ऊपर स्थित छत्र जो त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म, संघ) का प्रतिनिधित्व करता है।
- तोरण: मुख्य दिशाओं में बने अत्यधिक अलंकृत प्रवेश द्वार।
- प्रदक्षिणा पथ: परिक्रमा के लिए बनाया गया ऊंचा मार्ग।
- प्रमुख स्तूप:
- सांची का स्तूप (MP): सबसे पुराना पत्थर का स्तूप, मूल रूप से अशोक द्वारा निर्मित, शुंगों द्वारा विस्तारित।
- केसरिया स्तूप (बिहार): विश्व का सबसे ऊंचा स्तूप, अशोक द्वारा निर्मित।
- धमेख स्तूप (सारनाथ): प्रथम उपदेश के स्थान को चिह्नित करता है।
- पिपरहवा स्तूप (UP): शाक्य कुल द्वारा निर्मित सबसे प्राचीन जीवित स्तूप।

- बोधिसत्व:
- पद्मपाणि (अवलोकितेश्वर): हाथ में कमल; असीम करुणा के प्रतीक।
- वज्रपाणि: हाथ में वज्र; संरक्षक और मार्गदर्शक।
- मंजुश्री: 10 पारमिताओं का ग्रंथ हाथ में लिए हुए; बुद्धि के प्रतीक।
- मैत्रेय: भविष्य के बुद्ध।
- अमिताभ: अनंत प्रकाश के बुद्ध।
C. प्रमुख बौद्ध विश्वविद्यालय
| विश्वविद्यालय | स्थान | संस्थापक | शाही राजवंश |
|---|---|---|---|
| नालंदा | बड़गांव, बिहार | कुमारगुप्त-प्रथम | गुप्त साम्राज्य |
| विक्रमशिला | भागलपुर, बिहार | धर्मपाल | पाल वंश |
| सोमपुरी | उत्तरी बंगाल | धर्मपाल | पाल वंश |
| ओदंतपुरी | बिहार शरीफ, बिहार | गोपाल | पाल वंश |
| जगद्दल | उत्तरी बंगाल | रामपाल | पाल वंश |
| वल्लभी | गुजरात | भट्टार्क | मैत्रक वंश |
अध्याय 4: जैन धर्म — तीर्थंकर, वर्धमान महावीर, सिद्धांत और परिषदें
A. तीर्थंकर
- अवधारणा: तीर्थंकर वे महापुरुष हैं जिन्होंने संसार रूपी सागर को पार करने के लिए "तीर्थ" (घाट) का निर्माण किया। जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हैं।
- प्रथम तीर्थंकर: ऋषभदेव (आदिनाथ) — अयोध्या में जन्म; प्रतीक सांड है। ऋग्वेद में अरिष्टनेमि (22वें) के साथ इनका उल्लेख मिलता है। विष्णु और भागवत पुराण इन्हें नारायण का अवतार बताते हैं।
- 23वें तीर्थंकर: पार्श्वनाथ — काशी के राजा अश्वसेन के पुत्र; प्रतीक सर्प है। सम्मेद शिखर पर कैवल्य प्राप्त किया। इन्होंने चार महाव्रत (चातुर्याम धर्म) दिए: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह।
- 24वें तीर्थंकर: वर्धमान महावीर — प्रतीक सिंह है।
B. वर्धमान महावीर का जीवन परिचय
- जन्म: 540 ईसा पूर्व में वैशाली के पास कुण्डग्राम (बिहार) में हुआ।
- वंश: ज्ञातृक क्षत्रिय कुल। पिता: सिद्धार्थ। माता: त्रिशला (लिच्छवी राजकुमार चेटक की बहन)।
- विवाह: यशोदा से हुआ। पुत्री: प्रियदर्शना (अणोज्जा)। दामाद और प्रथम शिष्य: जामाली।
- गृहत्याग: 30 वर्ष की आयु में (बड़े भाई नंदिवर्धन की अनुमति से)। 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। मक्खलि गोसाल (आजीवक संप्रदाय के संस्थापक) से मिले।
- कैवल्य (ज्ञान प्राप्ति): 42 वर्ष की आयु में जृम्भिकग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के तट पर शाल वृक्ष के नीचे हुआ। इसके बाद उन्हें जिन, अर्हत्, निर्ग्रंथ और केवलिन कहा गया।
- प्रथम उपदेश: पावा में प्राकृत (अर्धमागधी) भाषा में दिया।
- मृत्यु (निर्वाण): 468 ईसा पूर्व (72 वर्ष की आयु) में पावापुरी (राजगीर के पास) में मल्ल राजा सृष्टिपाल के महल में संलेखना द्वारा हुई।
बुद्ध के मध्यम मार्ग के विपरीत, महावीर ने मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यधिक कठोर तपस्या और कायाक्लेश (जैसे संलेखना) की वकालत की।

C. सिद्धांत, दर्शन और परिषदें
- त्रिरत्न:
- सम्यक दर्शन (सच्ची श्रद्धा)
- सम्यक ज्ञान (सच्चा ज्ञान)
- सम्यक चरित्र (सच्चा आचरण)
- पंच महाव्रत:
- अहिंसा (जीवों की हत्या न करना) — इस पर अत्यधिक बल (सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए खेती भी वर्जित थी)।
- सत्य (झूठ न बोलना)
- अस्तेय (चोरी न करना)
- अपरिग्रह (संपत्ति संचय न करना / अनासक्ति)
- ब्रह्मचर्य (इंद्रिय संयम) — महावीर स्वामी द्वारा जोड़ा गया।
- स्याद्वाद / अनेकांतवाद: "शायद" का सिद्धांत या सत्य की बहुलता का सिद्धांत (सप्तभंगी ज्ञान)।
- सृष्टि विज्ञान: ब्रह्मांड शाश्वत है और 6 द्रव्यों (जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश, काल) से बना है। निर्माता ईश्वर को अस्वीकार करता है। यह मानता है कि प्रत्येक वस्तु (सजीव और निर्जीव दोनों) में आत्मा (जीव) होती है।
जैन परिषदें:
* प्रथम जैन परिषद (300 ई.पू.): पाटलिपुत्र में। संरक्षक: चन्द्रगुप्त मौर्य। अध्यक्ष: स्थूलभद्र। 12 अंगों का संकलन हुआ (लुप्त 14 पूर्वों के स्थान पर)। भद्रबाहु ने बहिष्कार किया।
* द्वितीय जैन परिषद (513 ई. / छठी सदी): वल्लभी (गुजरात) में। अध्यक्ष: देवर्धि क्षमाश्रमण। 12 अंगों और 12 उपांगों का अंतिम संकलन हुआ।
अध्याय 5: जैन संप्रदाय, साहित्य, शाही संरक्षक और कला
A. संप्रदाय विभाजन: दिगंबर बनाम श्वेतांबर
लगभग 300 ईसा पूर्व में मगध में पड़े भीषण 12 वर्षीय अकाल के कारण जैन भिक्षुओं का पलायन हुआ:
* दिगंबर (आकाश ही वस्त्र): भद्रबाहु के नेतृत्व में दक्षिण भारत (श्रवणबेलगोला, कर्नाटक) चले गए। इन्होंने पूर्ण नग्नता और कठोर तपस्या का पालन किया। इनका मानना है कि महिलाएं इस जन्म में सीधे मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकतीं।
* श्वेतांबर (श्वेत वस्त्र): स्थूलभद्र के नेतृत्व में मगध में ही रहे। इन्होंने सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति दी। इनका मानना है कि महिलाएं मोक्ष प्राप्त कर सकती हैं (जैसे 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ को श्वेतांबर महिला मानते हैं)।
B. जैन साहित्य (आगम साहित्य)
प्रारंभिक जैन आगम साहित्य प्राकृत (अर्धमागधी) भाषा में लिखा गया था। इसमें शामिल हैं:
* 12 अंग (मूल सिद्धांत)
* 12 उपांग (सहायक ग्रंथ)
* 10 प्रकीर्ण (विविध ग्रंथ)
* 6 छेदसूत्र (मठवासी नियम)
* 4 मूलसूत्र (बुनियादी ग्रंथ)
* भगवती सूत्र: इसमें 16 महाजनपदों की सूची मिलती है (बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय के समान)।
* कल्पसूत्र: संस्कृत में भद्रबाहु द्वारा लिखित तीर्थंकरों की जीवनी।
* आचारांगसूत्र: जैन भिक्षुओं के लिए आचार संहिता और नियम।
C. जैन धर्म के शाही संरक्षक और कला
- शाही संरक्षक: चन्द्रगुप्त मौर्य (भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला चले गए और संलेखना द्वारा प्राण त्यागे), सम्प्रति (अशोक के पौत्र), कलिंग नरेश खारवेल, राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष, चंदेल शासक।
- जैन कला और वास्तुकला:
- मथुरा कला शैली: मौर्योत्तर काल में जैन कला का प्रमुख केंद्र।
- दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू, राजस्थान): सोलंकी शासकों द्वारा निर्मित संगमरमर के प्रसिद्ध जैन मंदिर।
- गोमतेश्वर/बाहुबली की प्रतिमा (श्रवणबेलगोला, कर्नाटक): गंग वंश के मंत्री चामुंडराय द्वारा निर्मित 57 फीट ऊंची एकाश्म मूर्ति। यहाँ प्रत्येक 12 वर्ष में महामस्तकाभिषेक आयोजित किया जाता है।
- उदयगिरी और खंडगिरी गुफाएं (ओडिशा): कलिंग राजा खारवेल द्वारा संरक्षित चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं (इसमें हाथीगुम्फा शिलालेख स्थित है)।
अध्याय 6: प्रत्यक्ष तुलना — बौद्ध धर्म बनाम जैन धर्म
| विशेषता | बौद्ध धर्म | जैन धर्म |
|---|---|---|
| आत्मा की अवधारणा | अनात्मवाद (आत्मा के अस्तित्व को नकारता है) | जीववाद (मानता है कि हर वस्तु में आत्मा है) |
| मोक्ष का मार्ग | मध्यम मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) | अत्यधिक तपस्या / कायाक्लेश (संलेखना) |
| अहिंसा नीति | उदार (विशेष रूप से उनके लिए न मारे जाने पर मांस की अनुमति) | अत्यधिक कठोर (सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए खेती भी वर्जित) |
| प्राथमिक भाषा | पालि | प्राकृत (अर्धमागधी) |
| भौगोलिक प्रसार | भारत में पतन हुआ लेकिन विदेशों में व्यापक प्रसार हुआ (अशोक के कारण) | मुख्य रूप से भारत तक ही सीमित रहा, लगातार अस्तित्व बना रहा |
| निर्माता ईश्वर | मौन / अनीश्वरवादी | निर्माता ईश्वर को खारिज करता है; तीर्थंकर ही सर्वोपरि हैं |
अध्याय 7: त्वरित पुनरीक्षण तालिका
| मापदंड | बौद्ध धर्म | जैन धर्म |
|---|---|---|
| संस्थापक | गौतम बुद्ध | ऋषभदेव (प्रथम तीर्थंकर) |
| मुख्य प्रचारक | गौतम बुद्ध | वर्धमान महावीर (24वें) |
| जन्म तिथि/स्थान | 563 ई.पू., लुम्बिनी (नेपाल) | 540 ई.पू., कुण्डग्राम (वैशाली) |
| मृत्यु तिथि/स्थान | 483 ई.पू., कुशीनगर (यूपी) | 468 ई.पू., पावापुरी (बिहार) |
| ज्ञान प्राप्ति स्थान | बोधगया (निरंजना नदी, पीपल वृक्ष) | जृम्भिकग्राम (ऋजुपालिका नदी, शाल वृक्ष) |
| प्रथम उपदेश स्थान | सारनाथ (वाराणसी) | पावा (राजगीर के पास) |
| प्रथम परिषद | 483 ई.पू., राजगृह (संरक्षक: अजातशत्रु) | 300 ई.पू., पाटलिपुत्र (संरक्षक: चन्द्रगुप्त मौर्य) |
| मुख्य साहित्य | त्रिपिटक (सुत्त, विनय, अभिधम्म पिटक) | आगम (12 अंग, 12 उपांग) |
| मुख्य प्रतीक | कमल, सांड, घोड़ा, बोधि वृक्ष, स्तूप | सांड (ऋषभदेव), सर्प (पार्श्वनाथ), सिंह (महावीर) |
अध्याय 8: उच्च-उपज बहुविकल्पीय प्रश्न
Q1प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों की सूची निम्नलिखित में से किस बौद्ध ग्रंथ में मिलती है?
(A) दीघ निकाय (B) अंगुत्तर निकाय (C) मज्झिम निकाय (D) खुद्दक निकाय
उत्तर देखें
उत्तर: (B) अंगुत्तर निकाय
Q2वर्धमान महावीर ने निम्नलिखित में से किस वृक्ष के नीचे कैवल्य प्राप्त किया था?
(A) पीपल वृक्ष (B) बरगद वृक्ष (C) शाल वृक्ष (D) नीम वृक्ष
उत्तर देखें
उत्तर: (C) शाल वृक्ष
Q3किस राजा के शासनकाल में पड़े अकाल के कारण जैन धर्म का दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों में विभाजन हुआ था?
(A) अशोक (B) चन्द्रगुप्त मौर्य (C) बिम्बिसार (D) कनिष्क
उत्तर देखें
उत्तर: (B) चन्द्रगुप्त मौर्य
Q4पाटलिपुत्र में आयोजित तृतीय बौद्ध संगति के अध्यक्ष निम्नलिखित में से कौन थे?
(A) महाकश्यप (B) सावकमी (C) वसुमित्र (D) मोग्गलिपुत्त तिस्स
उत्तर देखें
उत्तर: (D) मोग्गलिपुत्त तिस्स
Q5गोमतेश्वर की 57 फीट ऊंची एकाश्म प्रतिमा और महामस्तकाभिषेक महोत्सव की मेजबानी के लिए कौन सा स्थान प्रसिद्ध है?
(A) दिलवाड़ा (B) माउंट आबू (C) श्रवणबेलगोला (D) उदयगिरी
उत्तर देखें
उत्तर: (C) श्रवणबेलगोला
Q6आनंद की सिफारिश पर बौद्ध संघ में प्रवेश पाने वाली पहली महिला शिष्या कौन थीं?
(A) यशोधरा (B) महाप्रजापति गौतमी (C) सुजाता (D) त्रिशला
उत्तर देखें
उत्तर: (B) महाप्रजापति गौतमी
Q7बौद्ध वास्तुकला में, अण्ड के ऊपर अवशेषों को रखने वाली रेलिंग जैसी संरचना को क्या कहा जाता है?
(A) छत्र (B) तोरण (C) मेधी (D) हर्मिका
उत्तर देखें
उत्तर: (D) हर्मिका
Q8भद्रबाहु द्वारा रचित "कल्पसूत्र" में किस जैन तीर्थंकर की जीवनी का विस्तृत वर्णन है?
(A) ऋषभदेव (B) पार्श्वनाथ (C) वर्धमान महावीर (D) अरिष्टनेमि
उत्तर देखें
उत्तर: (C) वर्धमान महावीर
Q9बिहार में प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किस पाल शासक ने की थी?
(A) गोपाल (B) धर्मपाल (C) देवपाल (D) रामपाल
उत्तर देखें
उत्तर: (B) धर्मपाल
Q10प्रारंभिक जैन आगम साहित्य के संकलन के लिए किस भाषा / बोली का प्रयोग किया गया था?
(A) पालि (B) संस्कृत (C) अर्धमागधी प्राकृत (D) शौरसेनी
उत्तर देखें
उत्तर: (C) अर्धमागधी प्राकृत