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प्राचीन इतिहास नोट्स
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मयोत्तर काल (उत्तर-मौर्य साम्राज्य)

मौर्यों के पतन से लेकर कुषाणों के अंत तक — देशी राजवंश, विदेशी आक्रमणकारी, शिलालेख, स्वर्ण मुद्राएँ, और वह कला जो सबसे लंबे समय तक जीवित रही।

प्राचीन इतिहास 185 BCE – 220 CE द्विभाषी · अं / हिं
Śशुंग Kकण्व Sāसातवाहन Chचेदि IGइंडो-ग्रीक Śkशक Paपहलव Kuकुषाण Artकला व प्रशासन ✓पुनरीक्षण Qप्रश्न

विषय सूची

01

देशी राजवंश

187 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में राजनीतिक विकेंद्रीकरण हुआ, जिसके कारण उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत में कई स्थानीय शक्तियों का उदय हुआ।

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शुंग राजवंश

185 BCE – 73 BCE
  • संस्थापक और उत्पत्ति: मौर्य सेना के ब्राह्मण सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसा पूर्व में एक सैन्य परेड के दौरान अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या कर शुंग वंश की स्थापना की।
  • राजधानी: पाटलिपुत्र से हटाकर मध्य प्रदेश के विदिशा में स्थानांतरित की गई।
  • भौगोलिक विस्तार: उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत, दक्षिण में नर्मदा नदी तक।
  • धार्मिक प्रकृति: वैदिक ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणवादी संस्कृति का पुनरुद्धार किया।
    • दो अश्वमेध यज्ञ किए, जिसका उल्लेख धनदेव के अयोध्या अभिलेख में मिलता है।
    • पतंजलि (संस्कृत व्याकरण के प्रणेता) उनके पुरोहित थे, जिन्होंने 'महाभाष्य' की रचना की।
  • प्रमुख युद्ध: डेमेट्रियस और मियंडर के इंडो-ग्रीक आक्रमणकारियों को पराजित किया; कलिंग के राजा खारवेल से युद्ध लड़ा और विदर्भ में विस्तार किया।
  • कला और साहित्य: बौद्ध ग्रंथ 'दिव्यावदान' में उन्हें बौद्ध मठों का विनाशक बताया गया, पर उन्होंने सांची और भरहुत के स्तूपों का जीर्णोद्धार व तोरणद्वारों का निर्माण कराया।
  • अग्निमित्र (149–141 ई.पू.): पुष्यमित्र का पुत्र, कालिदास के नाटक 'मालविकाग्निमित्रम्' का नायक।
  • पतन: अंतिम शासक देवभूति (83–73 ई.पू.) की हत्या उनके मंत्री वासुदेव कण्व ने की।
महत्वपूर्ण पुष्यमित्र शुंग एक ब्राह्मण सैन्य कमांडर थे जिन्होंने बौद्ध मौर्यों को हराकर पहले रूढ़िवादी ब्राह्मणवादी राजवंश की स्थापना की, जिससे सदियों बाद अश्वमेध यज्ञों का पुनः चलन शुरू हुआ।
अपवाद यद्यपि 'दिव्यावदान' में पुष्यमित्र को असहिष्णु बताया गया है, पुरातात्विक साक्ष्य दर्शाते हैं कि उनके शासनकाल में सांची और भरहुत स्तूपों का विस्तार व कलात्मक तोरणद्वारों का निर्माण हुआ।
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कण्व राजवंश

73 BCE – 28 BCE
  • संस्थापक: अंतिम शुंग राजा देवभूति की हत्या कर वासुदेव कण्व ने स्थापना की।
  • वर्गीकरण: "शुंगभृत्य" भी कहा जाता है, अर्थात "शुंगों के सेवक"।
  • राजधानी: पाटलिपुत्र।
  • पतन: अंतिम शासक सुशर्मा की हत्या सीमुक ने की, जिससे सातवाहन साम्राज्य की नींव पड़ी।
Vasudeva Kanva 73–64 BCE→ Bhumimitra 64–50 BCE→ Narayana→ Susharman 38–28 BCE
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सातवाहन राजवंश

230 / 50 BCE – 220 CE
  • पहचान और क्षेत्र: इन्हें आंध्र या आंध्रभृत्य भी कहा जाता था। इन्होंने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और गुजरात के भागों पर शासन किया।
  • संस्थापक: सीमुक (सिंधुका / शिप्राक)।
  • राजधानियाँ: गोदावरी तट पर पैठन (प्रतिष्ठान); प्रारंभिक राजधानी अमरावती मानी जाती है।
  • आधिकारिक भाषा: प्राकृत। राजा हाल ने 'गाथासप्तशती' की रचना की।
  • नामकरण बनाम उत्तराधिकार: मातृसत्तात्मक नामकरण (गौतमीपुत्र शातकर्णी, वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी) परंतु उत्तराधिकार कड़ाई से पितृसत्तात्मक था।
  • भूमि दान: ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि दान (अग्रहार) देने वाला पहला राजवंश।
  • मुद्रा: रोम से आयातित सीसा, पोटिन, तांबा, कांस्य, चांदी के सिक्के — प्राकृत शिलालेखों सहित।
  • शातकर्णी प्रथम: 'शातकर्णी' उपाधि धारण करने वाले पहले राजा; उनके यज्ञों का विवरण रानी नयनिका के नानेघाट अभिलेख में मिलता है।
  • गौतमीपुत्र शातकर्णी (106–130 ई.): सबसे महान शासक (21वें राजा)। नहपान को हराकर क्षहरात वंश समाप्त किया; नासिक अभिलेख में "एक ब्राह्मण" उपाधि (माता गौतमी बलश्री द्वारा); वर्ण व्यवस्था कड़ाई से लागू की।
  • वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी (130–154 ई.): शक राजा रुद्रदामन प्रथम की पुत्री से विवाह (कानेहरी अभिलेख) पर दो बार पराजित हुए; राजधानी प्रतिष्ठान स्थानांतरित की, रोम से व्यापार बढ़ाया।
  • यज्ञश्री शातकर्णी (165–194 ई.): अंतिम महान राजा — सिक्कों पर जलपोत अंकित, समुद्री व्यापार का प्रतीक।
  • स्थानीय प्रशासन: ग्रामीण प्रशासन गोलमिकों द्वारा — 9 रथ, 9 हाथी, 25 घोड़े, 45 पैदल सैनिकों के कमांडर।
महत्वपूर्ण सातवाहन कर-मुक्त भूमि अनुदान प्रथा के जनक थे, जिसने भारत में सामंतवाद के उदय की नींव रखी।
अपवाद माताओं के नाम अपनाने के बावजूद, राजपरिवार कड़ाई से पितृसत्तात्मक था — राजमाता सम्मानित थीं, पर उत्तराधिकार केवल पुरुष वारिसों को मिलता था।
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कलिंग का चेदि राजवंश

1ली शताब्दी ई.पू. – 1ली शताब्दी ई.स्वी
  • उत्पत्ति: मौर्य नियंत्रण कमजोर होने के बाद कलिंग (ओडिशा) में उदय; इसे महामेघवाहन राजवंश भी कहा जाता है।
  • संस्थापक: महामेघवाहन।
  • खारवेल — सबसे महान शासक (वंश के तीसरे राजा): कलिंग की सैन्य सर्वोच्चता पुनः स्थापित की, "भिक्षु राजा" की उपाधि धारण की, जैन धर्म के कट्टर अनुयायी थे; सातवाहनों, इंडो-ग्रीकों और मगध शासकों को पराजित किया; उदयगिरि पहाड़ियों में गुफाएँ बनवाईं (रानी गुफा, हाथीगुंफा, गणेश गुफा)।
  • हाथीगुंफा अभिलेख: खारवेल के जीवन का मुख्य, तिथि-रहित स्रोत — प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में, 38वें वर्ष तक की उपलब्धियों का लेखा-जोखा।
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विदेशी आक्रमण और राजवंश

मौर्यों के पतन के बाद, उत्तर-पश्चिम भारत को चीन की महान दीवार के निर्माण (जिसने खानाबदोश कबीलों को पश्चिम की ओर धकेला) और सेल्यूसिड साम्राज्य के कमजोर होने के कारण मध्य एशिया से सिलसिलेवार विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा।

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कालानुक्रमिक ट्रिक: I‑S‑P‑K (इंडो-ग्रीक → शक → पहलव → कुषाण) — याद रखें "I Shall Play Kabaddi" से।
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इंडो-ग्रीक राजवंश

2री शताब्दी ई.पू. – 1ली शताब्दी ई.पू.
  • मूल स्थान: बैक्टीरिया (हिंदूकुश के उत्तर में, आधुनिक अफगानिस्तान/ईरान सीमा) के हेलेनिस्टिक यूनानी शासक।
  • प्रथम आक्रमणकारी: डेमेट्रियस प्रथम (यूथेडेमस वंश), लगभग 190 ई.पू. — पंजाब और गांधार पर अधिकार, राजधानी साकल (स्यालकोट); हाथी हेलमेट वाले द्विभाषी सिक्के।
  • मियंडर प्रथम (मिलिंद) (165–145 ई.पू.): सबसे प्रसिद्ध इंडो-ग्रीक राजा। भिक्षु नागसेन से वाद-विवाद के बाद बौद्ध धर्म अपनाया — यह संवाद 'मिलिन्दपञ्हो' में दर्ज है।
  • मुद्रा में प्रथम: भारत में सर्वप्रथम स्वर्ण सिक्के जारी किए; सिक्कों पर शासकों के चित्र अंकित करने वाले पहले शासक; द्विभाषी, द्विलिपि सिक्के (यूनानी व खरोष्ठी प्राकृत)।
  • सांस्कृतिक योगदान: हेलेनिस्टिक कला ने गांधार शैली को प्रेरित किया; रंगमंच में यवनिका (पर्दा) और होराशास्त्र (ज्योतिष) की शुरुआत की।
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शक राजवंश

1ली शताब्दी ई.पू. – 5वीं शताब्दी ई.स्वी
  • उत्पत्ति: बोलन दर्रे के रास्ते चरागाहों की खोज में भारत आए मध्य एशियाई खानाबदोश कबीले।
  • पांच शाखाएं — काबुल, पंजाब, मथुरा, पश्चिमी भारत और ऊपरी दक्कन में राजधानियाँ। प्रथम शक राजा: गांधार में माउस (मोग)।
  • विक्रम संवत (57 ई.पू.): उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय के उपलक्ष्य में आरंभ।
  • पश्चिमी क्षत्रप — क्षहरात वंश: नहपान ने भड़ौच और उज्जैन पर नियंत्रण रखा, गौतमीपुत्र शातकर्णी द्वारा मारा गया।
  • पश्चिमी क्षत्रप — कर्दमक वंश: चष्टन द्वारा स्थापित; प्रसिद्ध राजा रुद्रदामन प्रथम (130–150 ई.) ने बिना बेगार के सुदर्शन झील (गिरनार) का पुनरुद्धार कराया, और जूनागढ़ अभिलेख जारी किया — भारत का पहला और सबसे लंबा शुद्ध संस्कृत शिलालेख (ब्राह्मी लिपि, "काव्य" शैली)।
  • पतन: अंतिम पश्चिमी क्षत्रप रुद्रसिंह तृतीय को गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने 5वीं सदी की शुरुआत में पराजित कर मार डाला।
महत्वपूर्ण रुद्रदामन प्रथम का जूनागढ़ अभिलेख शुद्ध संस्कृत में पहला लंबा शिलालेख है — यह दर्शाता है कि विदेशी शासकों ने भी प्राकृत के स्थान पर संस्कृत को संरक्षण दिया।
अपवाद — सुदर्शन झील का इतिहास
Pushyagupta (निर्माण)→ Tushaspha (नहर)→ Rudradaman I (जीर्णोद्धार)→ Skandagupta (पुनर्स्थापित)
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इंडो-पार्थियन / पहलव राजवंश

1ली शताब्दी ई.स्वी – 3री शताब्दी ई.स्वी
  • उत्पत्ति: ईरान (प्राचीन फारस) से आए, उत्तर-पश्चिम भारत में शकों का स्थान लिया। संस्थापक: मिथिडेट्स प्रथम।
  • गोंडोफर्नीस प्रथम (19–46 ई.): सबसे प्रसिद्ध पहलव राजा। सेंट थॉमस ईसाई धर्म के प्रचार हेतु इनके दरबार में आए।
  • राजधानी: तक्षशिला (प्रशासनिक केंद्र) और काबुल।
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कुषाण राजवंश

1ली शताब्दी ई.स्वी – 3री शताब्दी ई.स्वी
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छवि जोड़ें — कनिष्क की स्वर्ण मुद्राएँ और कुषाण कला
  • उत्पत्ति: मध्य एशिया की खानाबदोश यूची (तोखारी) जनजाति, ह्युंग्नू द्वारा विस्थापित; कडफिसेस वंश के तहत पांच कबीले एकजुट हुए।
Kujula Kadphises 30–80 CE→ Vima Taktu 80–95 CE→ Vima Kadphises 95–127 CE→ Kanishka I 127–150 CE→ Vasudeva I (अंतिम)
  • कुजुल कडफिसेस (30–80 ई.): संस्थापक — रोमन सिक्कों की नकल पर तांबे के सिक्के जारी किए, धर्म-थिडा व सत्य-धर्म-थिडा उपाधि।
  • विम कडफिसेस (95–127 ई.): भारत में नियमित उपयोग हेतु सर्वप्रथम सोने के सिक्के; कनिष्क के पिता होने की पुष्टि रबातक अभिलेख से।
  • कनिष्क प्रथम (127–150 ई., पारंपरिक 78 ई.): सबसे महान कुषाण राजा, "द्वितीय अशोक"। राजधानियाँ: पुरुषपुर (पेशावर), द्वितीय मथुरा।
    • शक संवत (78 ई.) — 1957 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में अपनाया गया।
    • चतुर्थ बौद्ध संगीति कुंडलवन (कश्मीर) में, अध्यक्षता वसुमित्र — बौद्ध धर्म हीनयान व महायान में विभाजित; कनिष्क ने महायान को संरक्षण दिया।
    • रेशम मार्ग (सिल्क रोड) पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने वाले प्रथम भारतीय शासक — रोमन सोने के बदले रेशम, मसाले, कपड़ा व्यापार।
    • साम्राज्य गंगा नदी से लेकर मध्य एशिया की ऑक्सस (अमु दरिया) नदी तक विस्तृत था।
  • कनिष्क के दरबारी विद्वान: चरक (राजवैद्य, 'चरक संहिता'); अश्वघोष (कवि, 'बुद्धचरितम्', 'सौन्दरानन्द'); नागार्जुन ("भारत का आइंस्टीन", शून्यता सिद्धांत, 'माध्यमिक सूत्र'); वसुमित्र (चतुर्थ संगीति अध्यक्ष, 'महाविभाषा सूत्र')।
  • पतन: शैव धर्म की ओर झुकाव — अंतिम महान शासक वासुदेव प्रथम ने हिंदू नाम अपनाया, सिक्कों पर शिव अंकित।
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संस्कृति, कला और प्रशासन

गांधार बनाम मथुरा कला शैली

कुषाण काल में भारतीय मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास हुआ।

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छवि जोड़ें — गांधार बनाम मथुरा कला शैली
विशेषता गांधार शैली मथुरा शैली
उत्पत्ति व प्रभाव विदेशी / हेलेनिस्टिक (यूनानी व रोमन) पूर्णतः स्वदेशी
सामग्री धूसर/नीलाभ शिस्ट बलुआ पत्थर चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर
धार्मिक क्षेत्र केवल बौद्ध समन्वयवादी — हिंदू, बौद्ध, जैन
प्रभामंडल शैली सादा, सरल अत्यंत अलंकृत
बुद्ध की बनावट गठीला बदन, घुंघराले बाल, रोमन टोगा वस्त्र आध्यात्मिक भाव, मुंडित सिर, मंद मुस्कान
भौगोलिक केंद्र तक्षशिला (पाकिस्तान/अफगानिस्तान) मथुरा (उत्तर प्रदेश)

प्रशासनिक नवाचार

  • क्षत्रप प्रणाली: प्रांतों पर सैन्य गवर्नर — महाक्षत्रप (वरिष्ठ) और क्षत्रप (कनिष्ठ), यूनानी शब्द 'इस्ट्रेटगोस' से व्युत्पन्न।
  • देवकुल अवधारणा: मृत राजाओं की मूर्तियों की पूजा हेतु देवमंदिर, दैवीय राजत्व (देवपुत्र) का सुदृढ़ीकरण।
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त्वरित पुनरीक्षण तालिका

शासक राजधानी प्रमुख अभिलेख/ग्रंथ विशेष तथ्य
Pushyamitra ShungaVidishaAyodhya Inscription (धनदेव)अंतिम मौर्य की हत्या; अश्वमेध पुनर्जीवित
AgnimitraVidishaMalavikagnimitramभारत के प्रथम रोमांटिक नाटक का नायक
SimukaPaithanMatsya Puranaसुशर्मा कण्व को मारकर सातवाहन वंश की स्थापना
Gautamiputra SatakarniPaithanNasik Cave Inscriptionसातवाहन गौरव बहाल; "एक ब्राह्मण"; नहपान को हराया
KharavelaKalingaHathigumpha Inscription"भिक्षु राजा"; कलिंग के महानतम शासक; जैन संरक्षक
Menander ISialkot (Sakala)Milindapanhoनागसेन द्वारा बौद्ध धर्म में दीक्षित यवन राजा
Rudradaman IUjjainJunagarh Rock Inscriptionसुदर्शन झील पुनरुद्धार; प्रथम लंबा संस्कृत अभिलेख
Gondophares ITaxilaद्विभाषी सिक्केसेंट थॉमस इनके शासनकाल में आए
Kujula KadphisesPeshawarतांबे के अनुकरणीय सिक्के5 यूची कबीलों को एकजुट किया; कुषाण वंश की स्थापना
Vima KadphisesPeshawarRabatak Inscriptionनियमित व्यापार हेतु स्वर्ण सिक्के प्रारंभ
Kanishka IPeshawar & MathuraSarnath Inscriptionशक संवत आरंभ; चतुर्थ बौद्ध संगीति आयोजित
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अभ्यास प्रश्न (MCQs)